क्रिसमस आने ही वाला है और पिछले एक सप्ताह में हमने यीशु के मुहँ से सुना कि जब तक आप नया जन्म नहीं लेते, आप परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते।

और फिर, यीशु के अनुसार, फिर से जन्म लेने के लिए, आपको पानी (जो पहली सदी में पश्चाताप के लिए धार्मिक शब्द था, जिसका मतलब है अपने पाप से दूर हो जाना) और आत्मा (दूसरे शब्दों में, नया जीवन जीना) दोनों से पैदा होना चाहिए। जीवन में ऐसा नयापन जो पवित्र आत्मा की उपस्थिति से आता है)।

अब मैं एक बात स्पष्ट कर दूँ। यह एक गंभीर बात है। यह एक हल्की फुलकी “यीशु कृपया मुझे बचाओ” वाली प्रार्थना वह नहीं है जिसके बारे में प्रभु यीशु यहाँ बात कर रहे हैं। अच्छी खबर यह है कि वह हमारे पापों के बावजूद नहीं, बल्कि हमारे पाप के कारण आया था। हमें सजा देने के लिए नहीं, बल्कि हमें बचाने के लिए आया। यह एक सनसनीखेज खबर है। लेकिन यह खबर हमें एक बहुत ही स्पष्ट, एक बहुत ही सख्त विकल्प देती है।

यूहन्ना 2:17,18 17परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को संसार में इसलिए नहीं भेजा कि वह संसार को दोषी ठहराए। उसने उसे इसलिए भेजा है, कि संसार उसके द्वारा मुक्‍ति प्राप्‍त करे। 

18“जो पुत्र में विश्‍वास करता है, वह दोषी नहीं ठहराया जाता है। जो विश्‍वास नहीं करता, वह दोषी ठहराया जा चुका है; क्‍योंकि वह परमेश्‍वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्‍वास नहीं करता।

आप और मेरे जैसे पापियों के लिए अपने अटूट महान प्रेम के कारण, यीशु हमें बचाने के लिए आए। हमारे पाप को उस क्रूस पर, अपने ऊपर ले कर, उन्होंने हमें बचाने की कीमत चुका दी।

लेकिन वह हमें एक विकल्प भी देता है। यीशु में “विश्वास” करने के लिए (जैसा यूहन्ना 3:16 में है)।  दूसरे शब्दों में, ऊपरी तौर से विश्वास करने के लिए, बल्कि अपने पूरे तन मन और आत्मा से उस पर विश्वास करने के लिए… या फिर विश्वास ना करने के लिए। .

अब विश्वास करना या ना करना  यह आपकी इच्छा है।

यह परमेश्वर का ताज़ा वचन है। आज …आपके लिए…।

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